ताज़ा तरीन

अंग्रेज़ी सभ्यता का प्रतीक नहीं है सिर्फ़ एक भाषा है

अंग्रेज़ी सभ्यता का प्रतीक नहीं है सिर्फ़ एक भाषा है

  कमलेश जोशी बात तब की है जब मैंने दिल्ली विश्वविद्यालय में दाख़िला लिया. गॉंव से गया एक लड़का जिसने दिल्ली का नाम भर सुना था अचानक गॉंव की प्राकृतिक जिंदगी छोड़कर दिल्ली की मशीनी जिंदगी में प्रवेश कर गया था. नानकमत्ता एक क़स्बा है और 2007 में तो लगभग गांव ही था जहां के […] Read more

शहीद 30 ड्राइवर-कंडक्टर भाईयों को याद एवं नमन

शहीद 30 ड्राइवर-कंडक्टर भाईयों को याद एवं नमन

अरुण कुकसाल सतपुली ञासदी की पुण्यतिथि (14 सितम्बर, 1951) द्वी हजार आठ भादों का मास, सतपुली मोटर बोगीन खास…. हे पापी नयार कमायें त्वैकू, मंगसीरा मैना ब्यो छायो मैकू……. मेरी मां मा बोल्यान नी रयीं आस, सतपुली मोटर बोगीन खास. (सतपुली नयार बाढ़ दुर्घटना-गढ़माता के निरपराध ये वीर पुत्र मोटर मजदूर जन यातायात की सेवार्थ […] Read more

सम्पादकीय

पाठ्यक्रम में पढ़ायें जायें हरेला और काले कव्वा

पाठ्यक्रम में पढ़ायें जायें हरेला और काले कव्वा

राजीव लोचन साह श्रावण मास की संक्रान्ति को उत्तराखंड, विशेषकर कुमाऊँ में परम्परागत रूप ‘हरेला पर्व’ मनाया जाता है। न जाने कब से। अब ‘पर्यावरण’ शब्द के आविष्कार के बाद तो इसे पर्यावरण से जोड़ा जाने लगा है और वृक्षारोपण जैसे सरकारी अनुष्ठान भी किये जाने लगे हैं। हरीश रावत की पिछली कांग्रेस सरकार ने […] Read more

वन नेशन, वन इलैक्शन

वन नेशन, वन इलैक्शन

राजीव लोचन साह निःसन्देह इक्कीसवीं सदी के भारत में नरेन्द्र मोदी सबसे चमत्कारी राजनेता हैं। उनसे असहमत हुआ जा सकता है, मगर इस तथ्य को नकारा नहीं जा सकता कि वे जो कुछ कहते हैं, वह तत्काल केन्द्रीय मुद्दा बन कर देश में चर्चा का विषय हो जाता है। दूसरी बार सत्ता में आने पर […] Read more

आशल कुशल

देश दुनिया

सुनियोजित था खटीमा का नरसंहार

सुनियोजित था खटीमा का नरसंहार

उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान हुए खटीमा गोली कांड के बाद छपी यह रिपोर्ट ‘नैनीताल समाचार’ के 15-30 सितम्बर के  अंक में प्रकाशित हुई थी। इस दुर्भाग्यप... Read more

खटीमा गोली कांड की 25वीं बरसी : आज भी नहीं बन सका शहीदों के सपनों का उत्तराखंड

खटीमा गोली कांड की 25वीं बरसी : आज भी नहीं बन सका शहीदों के सपनों का उत्तराखंड

विनीता यशस्वी 1 सितंबर 1994 का ही वो काला दिन था जब हजारों आंदोलनकारी उत्तराखण्ड राज्य की मांग को लेकर खटीमा की सड़कों पर उतरे। जब वह शांतिपूर्ण तरीके... Read more

किताबें

समीक्षा : अतीत और वर्तमान की गहरी पड़ताल

समीक्षा : अतीत और वर्तमान की गहरी पड़ताल

डाॅ. कपिलेश भोज उŸाराखण्ड के जाने-माने इतिहासविद् और लेखक ताराचन्द्र त्रिपाठी (जन्म: 24 जनवरी, सन् 1940) की-सन् 1998 में राजकीय इण्टर काॅलेज, नैनीताल... Read more

“एका” किसान आन्दोलन और आजादी की लड़ाई में वर्ग हितों की टकराहट का दस्तावेज

“एका” किसान आन्दोलन और आजादी की लड़ाई में वर्ग हितों की टकराहट का दस्तावेज

पुरुषोत्तम शर्मा पुस्तक समीक्षा 1920 से 1928 के बीच अवध के दो महान किसान नेताओं बाबा रामचंद्र और मदारी पासी के नेतृत्व में चले किसान संघर्षों के बारे... Read more

साहित्य और संस्कृति

बचपन की यादों को ‘हुंगरा’ देकर जीवंत करती किताब : ‘मेरी यादों का पहाड़’

बचपन की यादों को ‘हुंगरा’ देकर जीवंत करती किताब : ‘मेरी यादों का पहाड़’

डाॅ. अरुण कुकसाल ‘आ, यहां आ। अपनी ईजा से आखिरी बार मिल ले। मुझसे बचन ले गई, देबी जब तक पढ़ना चाहेगा, पढ़ाते रहना।’ उन्होने किनारे से कफन हटाकर मेरा हाथ... Read more

6 सितम्बर, 1932 'पौड़ी क्रान्ति' के नायक जयानन्द ‘भारतीय

6 सितम्बर, 1932 ‘पौड़ी क्रान्ति’ के नायक जयानन्द ‘भारतीय

डॉ. अरुण कुकसाल ‘गो-बैक मेलकम हैली’ ‘भारत माता की जय’ हाथ में तिरंगा उठा, नारे भी गूंज उठे, भाग चला, लाट निज साथियों की रेल में, जनता-पुलिस मध्य, शेर... Read more

पर्यावरण

पॉलीथिन बाबा का प्रभात

पॉलीथिन बाबा का प्रभात

मृगेश पाण्डे गाँधी जयंती पर देश को पॉलिथीन मुक्त करने का सन्देश लालकिले की प्राचीर से देते मोदी बाबा. हिमालय बचाओ पॉलिथीन हटाओ,ग्रेस मार्क्स की जगह ग्... Read more

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