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नेपाल की प्रलय और उत्तराखंड का सवाल: क्या हम अपनी नदियों के मुहानों को बचाने के लिए तैयार हैं?

नेपाल की प्रलय और उत्तराखंड का सवाल: क्या हम अपनी नदियों के मुहानों को बचाने के लिए तैयार हैं?

शीशपाल गुसाईं हिमालय ने एक बार फिर अपनी खामोशी तोड़ी है। नेपाल और तिब्बत की सीमा पर 26 अगस्त 2026 को आई विनाशकारी बाढ़ ने जिस तरह देखते-देखते गांवों, पुलों, सड़कों, बिजली परियोजनाओं और नदी किनारे बसे जीवन को निगल लिया, उसने पूरे हिमालयी क्षेत्र के सामने एक असहज सवाल खड़ा कर दिया है—क्या हम […] Read more

यादों के झरोखे से

यादों के झरोखे से

 दिनेश शास्त्री कथाकार, साहित्यकार और उपन्यासकार के रूप में हिन्दी की दीर्घकालीन साधना के बाद बल्लभ डोभाल रूपी नक्षत्र अंतरिक्ष की आकाशगंगा में विलीन हो गया लेकिन उनकी यायावरी और उच्च कोटि का लेखन एक थाती बन कर पीढ़ियों को उनके योगदान का स्मरण दिलाता रहेगा। 30 मार्च 1930 में उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल में […] Read more

सम्पादकीय

जेन जी से राजनीतिक बदलाव की उम्मीद न करें।

जेन जी से राजनीतिक बदलाव की उम्मीद न करें।

राजीव लोचन साह 25 जुलाई का दिन उत्तराखंड के इतिहास में बहुत महत्वपूर्ण है. इस दिन अमर बलिदानी श्री देव सुमन ने टिहरी रियासत के खिलाफ लड़ते हुए अपने प्राणों का उत्सर्ग किया था. अब यह तिथि एक और कारण से भारत के इतिहास में दर्ज हो गई है कि इसी रोज भारत के युवाओं […] Read more

सरकार के स्तर पर तो पाखंड है हरेला

सरकार के स्तर पर तो पाखंड है हरेला

राजीव लोचन साह अपने प्रकाशन के चैथे साल यानी वर्ष 1981 से नैनीताल समाचार ने अपने पाठकों को छपा हुआ हरेले का तिनड़ा भेजना शुरू किया था और छठे वर्ष यानी 1983 से बाकायदा टोकरियों में उगाया हुआ असली हरेला। इसका बहुत अच्छा असर हुआ। हरेला कुमाऊँ का पारम्परिक लोक पर्व है। हर घर में […] Read more

आशल कुशल

देश दुनिया

संस्कृतिकर्मी, रंगकर्मी, शिक्षाविद प्रो. डी आर पुरोहित इंद्रमणि बडोनी सम्मान से नवाजे गए

संस्कृतिकर्मी, रंगकर्मी, शिक्षाविद प्रो. डी आर पुरोहित इंद्रमणि बडोनी सम्मान से नवाजे गए

दिनेश शास्त्री दून लाइब्रेरी एंड रिसर्च सेंटर में मंगलवार को आयोजित सादे किंतु गरिमामय समारोह में इस वर्ष का इंद्रमणि बडोनी सम्मान उत्तराखंड की प्रख्य... Read more

निर्मल पुर्जा : गुरखा सैनिक से हिमालय की चोटियों के इतिहास तक

निर्मल पुर्जा : गुरखा सैनिक से हिमालय की चोटियों के इतिहास तक

विनीता यशस्वी   पहाड़ों की अपनी कोई भाषा नहीं होती, लेकिन वे उन लोगों की कहानियां जरूर याद रखते हैं, जो उनकी चोटियों तक पहुंचने के लिए अपनी पूरी... Read more

किताबें

पुस्तक समीक्षा  : पराक्रमो विजयते .. अंग्रेज़ी में कहें तो Valour

पुस्तक समीक्षा : पराक्रमो विजयते .. अंग्रेज़ी में कहें तो Valour

कार्यालय प्रतिनिधि  Triumphs.. ये उस कुमाऊं रेजिमेंट का आदर्श वाक्य (motto) है जिसका नाम भारतीय सेना के इतिहास के पन्नों में स्वर्णाक्षरों में अंकित ह... Read more

'आम आदमी के नाम पर'

‘आम आदमी के नाम पर’

 आनंद स्वरूप वर्मा  भ्रष्टाचार और महंगाई से ग्रस्त माहौल के बीच एक नए विकल्प के रूप में आम आदमी पार्टी का उदय भारत के संसदीय इतिहास की एक महत्वपूर्ण प... Read more

साहित्य और संस्कृति

रक्षा बंधन (जन्यो पुन्यू)

रक्षा बंधन (जन्यो पुन्यू)

माया पांडे येन वद्धो बलि राजा दानवेन्द्रो महाबलः तेन त्वां प्रतिबध्यामि रक्षे मा चल मा चल। दानवीर बलि प्रह्लाद के पौत्र थे। दानी व सत्यवादी थे। एक बार... Read more

लोक गायिकाओं का समृद्ध इतिहास रहा है पहाड़ो में

लोक गायिकाओं का समृद्ध इतिहास रहा है पहाड़ो में

चंद्रशेखर तिवारी उत्तराखंड के पहाड़ों में लोकगीत और लोकनृत्य केवल मनोरंजन के साधन नहीं, बल्कि यहां की सामाजिक-सांस्कृतिक जीवनधारा के अभिन्न अंग रहे है... Read more

पर्यावरण

धरती के छोटे झटके, बड़े सवाल : क्या उत्तराखंड अगले भूकंप के लिए तैयार है?

धरती के छोटे झटके, बड़े सवाल : क्या उत्तराखंड अगले भूकंप के लिए तैयार है?

शीशपाल गुसाईं उत्तराखंड में इन दिनों धरती के हल्के-हल्के झटके एक बार फिर उन लोगों की स्मृतियों को कुरेद रहे हैं, जिन्होंने 1991 के उत्तरकाशी और 1999 क... Read more

क्या चंद्रशिला बुग्याल बचाने की कोशिश उम्मीद जगाती है

क्या चंद्रशिला बुग्याल बचाने की कोशिश उम्मीद जगाती है

गोविंद पंत ‘राजू’ ओवर टूरिज्म हिमालयी इलाकों की एक बड़ी समस्या बनता जा रहा है।प्रत्यक्ष रूप में तो इससे इन क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था में स... Read more

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