ताज़ा तरीन

घाटे की खेती: अब भारी बारिश से धान, कपास, बाजरा-ज्वार को नुकसान

घाटे की खेती: अब भारी बारिश से धान, कपास, बाजरा-ज्वार को नुकसान

राजू सजवान सुखदीप सिंह इस साल 2022 में लगातार खेती में नुकसान का सामना कर रहे हैं। सात जनवरी 2022 को बहुत भारी बारिश हुई। उन्होंने 10 एकड़ में आलू लगाया था। जो पककर लगभग तैयार हो चुका बड़ा आलू था, बारिश के पानी में गल गया। प्रति एकड़ 20 से 25 हजार रुपए का […] Read more

बेहतर हो ऐसी खबरों का अकाल पड़ जाए

बेहतर हो ऐसी खबरों का अकाल पड़ जाए

प्रीति बिष्ट ( लेखिका न्यूज 18 में एंकर रहीं हैं) बात आज से करीब 8-10 साल पहले की है. शाम 7 बजे का वक्त रहा होगा, न्यूज़ रूम में गहमागहमी थी उत्तरप्रदेश की खबरों का बुलेटिन Hit प्रारम्भ हो चुका था और उत्तराखंड की टीम 7.30 बजे की तैयारी में जुटी हुई थी। मैं भी […] Read more

सम्पादकीय

हरेला सिर्फ हरियाली का त्यौहार नहीं

हरेला सिर्फ हरियाली का त्यौहार नहीं

राजीव लोचन साह हरेला सिर्फ पेड़ों और हरियाली का त्यौहार नहीं है, यह मनुष्य को पर्यावरण को लेकर संवेदनशील बनाने की एक कोशिश है। इसी तरह मकर संक्रान्ति को मनाया जाने वाला बच्चों का ‘काले कव्वा’ का त्यौहार उन्हें कौवों या पक्षियों से ही नहीं जोड़ता, प्राणिमात्र के प्रति संवेदनशील बनाता है। जब यह त्यौहार […] Read more

उदारीकरण की दौड़ तेज हुई है

उदारीकरण की दौड़ तेज हुई है

राजीव लोचन साह वर्ष 1991 में कांग्रेस की तत्कालीन नरसिंहाराव सरकार ने निजीकरण और आर्थिक उदारीकरण का जो चक्र शुरू किया था, उसने इधर 360 डिग्री की यात्रा पूरी कर ली है। उससे पहले जीवन बड़ा सरल था। पीने का पानी जल सप्लाई की टोंटियों से मिल जाया करता था। सरकारी नौकरियों में पेंशन होती […] Read more

आशल कुशल

देश दुनिया

गढ़कुमौं के रिश्तों की महक बयां करती है ‘बाल मिठाई’ और ‘सिगौड़ी’

गढ़कुमौं के रिश्तों की महक बयां करती है ‘बाल मिठाई’ और ‘सिगौड़ी’

डाॅ. योगेश धस्माना/सुन्दर सिंह बिष्ट समाज में परस्पर रिश्तों और भावनाओं को व्यक्त करने में मिठाई की भूमिका अहम रही है। यही कारण है कि गढ़वाल-कुमाऊँ के... Read more

सीने में जलन आंखों में तूफान सा क्यों है : क्योंकि हम अमृत महोत्सव के साल में चल रहे हैं

सीने में जलन आंखों में तूफान सा क्यों है : क्योंकि हम अमृत महोत्सव के साल में चल रहे हैं

नवीन बिष्ट             ‘‘सीने में जलन आंखों में तूफान सा क्यों है, इस शहर में हर शख्स परेशान सा क्यों है ? दिल है तो धड़कने का बहाना कोई ढँूढें, पत्थर... Read more

किताबें

समाज के सच से रूबरू कराता ’हैंडल पैंडल’

समाज के सच से रूबरू कराता ’हैंडल पैंडल’

डॉ करुणा शर्मा कहानी साहित्य जगत की ऐसी महत्वपूर्ण विधा है जिसे बच्चा भी पढ़ना चाहता है और बड़ा भी, सामान्यजन भी पढ़कर आनंदित होता है और विद्वज्जन भी। आज... Read more

पुस्तक चर्चा: ‘इन द सर्विस ऑफ़ फ्री इंडिया’

पुस्तक चर्चा: ‘इन द सर्विस ऑफ़ फ्री इंडिया’

कमल जोशी पुस्तक के परिचय में रत्ना एम. सुदर्शन लिखती हैं, “यह किताब उन लोगों को आश्चर्यचकित करेगी जो मेरे पिता को जानते थे”. आई.सी.एस. अधिकारी रहे और‘... Read more

साहित्य और संस्कृति

पहाड़ों में आज भी है रोपाई की परम्परा

पहाड़ों में आज भी है रोपाई की परम्परा

विनोद पंत आज भले ही हमारे खेत बंजर हो रहे हैं | हम गुणी बानरों की बात कहकर खेती छोड रहे हों पर एक समय वो भी था जब खेती के लिए लोग नौकरी छोडकर घर आ जात... Read more

पुण्यतिथि (20 मई, 2012) पर विशेष : पहाड़ की संवेदनाओं के कवि थे शेरदा 'अनपढ़'

पुण्यतिथि (20 मई, 2012) पर विशेष : पहाड़ की संवेदनाओं के कवि थे शेरदा ‘अनपढ़’

चारू तिवारी मेरी ईजा बग्वालीपोखर इंटर कालेज के दो मंजिले की बड़ी सी खिड़की में बैठकर रेडियो सुनती हुई हम पर नजर रखती थी। हम अपने स्कूल के बड़े से मैदा... Read more

पर्यावरण

कहो.. केदार क्या हाल हैं..!!

कहो.. केदार क्या हाल हैं..!!

केशव भट्ट पहली बार केदारनाथ गया तो वहां के हाल देख पर्यावणविद सुंदरलाल बहुगुणाजी का कहा याद आया कि, ‘ग्लेशियर धीरे—धीरे मरुस्थल में बदल रहे हैं.... Read more

नैनीताल के रामगाड़ व शिप्रा नदी में मानसून में भी पर्याप्त पानी नहीं

नैनीताल के रामगाड़ व शिप्रा नदी में मानसून में भी पर्याप्त पानी नहीं

जगदीश जोशी नैनीताल की उत्तर वाहिनी शिप्रा नदी व रामगाढ़ नदी मानसून में भी पानी की कमी से जूझ रही हैं। प्रदेश के गैर हिमनी नदियों में पिछले कुछ सालों स... Read more

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